अभी शाम में कुछ ….

अभी शाम में कुछ असर  बाकी है उसके आने  की ख़बर में हलचल बाकी है || कुछ कमी-थी निशा के आग़ोश में उसके आने  से उस कमी में आँच लगनी बाकी है || वक़्त के सफ़े पे इक स्याही लगानी बाकी है उसकी सहमी-सियाह रातों की स्याही बाकी है || तुम्हारे  आवाज में अभी असर…

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जब भी मिलते हो…

जब भी मिलते हो तुम किसी से। यूं मिलते हो ज्युं कोई मिले जिंदगी से।। तुम्हारी अधरों में ये जो छिपा है। हू-ब-हू मिलता है तुम्हारी नज़रों के ख्वाबों से।। मैंने बारहा देखा है इन पलकों में। ख़्वाब जो देखते हो झलकता है चेहरे से।। गुम न जाएं कोई इन भुल-भुलैये में। खौफ़ है क़ैफ़…

जाना कहाँ है कुछ तो पता मिला

जाना कहाँ  है  कुछ तो पता मिला तुझसे मिलने के बाद अपना पता मिला तू सुबह से शाम तक की राहें दिखा रहा अब रात कहा ठहरें सुझा जरा तेरी पनाह में मेरा चाँद सुरज को मिल रहा वक्त का ईशा मुझे तुझसे ही बता रहा जाना है कहा..... मैंने पूछा था जो कभी ईश्वर…

हमें अक्कासी नहीं आती…

हमें अक्कासी नहीं आती। वरना! तेरी अक्स में भी जान डाल देते।। ख़त क्या है हर अल्फ़ाज़ को रुह दे देता। ग़र निक्कमा सिवानी से अक़ीदा न हुआ होता।। अटकलबाजी जो होती रही मिरे अकेतन पे। वो बेवजह न होती ग़र ख़सुर-ए-इश्क़ न होते।। रंजिश में समुचा पासा हमसे हुआ होता। छल किया होता तिरा…

Tera Chehra Yaha Dhikhayi…

तेरा चेहरा यहां दिखाई देता हैं। बाद तेरे रुख़स्त के तन्हाई दिखाई देता है।। मैंने अंदाज़ा कभी नहीं लगाया था। तेरी हिज़्र में बहारा ख़िजा हो जाएगा।। अब वो दिन आये, न आये कोई फिर भी। तेरी आने की झुठी आहट़ सुनाई देता है।। ना हुँ मुज़रिम, मैंने भी वक़ालत की हैं। पर तेरी अदालत…

Hum Abhi Abhi To Aaye Hai …..

हम अभी-अभी तो आए है  चंद घड़ी हुए तेरे शहर में आए है,  हमको लोग तेरे शहर के बड़े गौर से देखते है  क्या इस शहर कभी कोई मुसाफ़िर नही आए है | इल्म हमको दिया होता ग़र फिज़ाओ ने  तेरे शहर मुसाफ़िर नही आते तो हम काफ़िला लाए होते देख लेते वो भी तेरे…